कश्मकश

 

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अजीब, मुझे अक्सर लगता है कि मैं यात्री बन गया हूँ ।

अपनी पसंद से नहीं, बल्कि किसी के खेल से

एक कठपुतली, जिसके पास कहने के लिए कुछ नहीं है

मेरा मालिक धागे चलाता और मैं चलता रहता हूँ।

कभी-कभी पूर्वानुमान गति में, कभी-कभी मैं दौड़ने लगा हूँ ।

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ऐसे ही एक दिन मुझे लगा कि मैं स्वतंत्र हूँ क्योंकि कुछ धागे मेरे पास हैं।

फिर भी मुझे पता है कि वे संभवतः गति को नियंत्रित करते हैं।

मैंने सोच-विचार किया कि क्यों मुझे इन धागे को काटने की जल्दी है

लेकिन फिर प्रकृति ने मुझे आपकी योजना के बारे में बताया

क्यों ये चलना फिरना मुझे नियंत्रित लगता है ?

क्या यह महज मेरी धारणा है

या मेरी संकीर्ण सोच मुझे ऐसा महसूस कराती है

 

क्या मैं गुलाम हूँ?

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इस तरह के एक पल में मैंने खुद को समर्पित कर दिया

न आवेश में किया, न ही मैंने कोई त्याग किया

लेकिन अपने विश्वास में, मैंने यह अभ्यर्पण किया।

अब मुझे लगता है कि मैं सभी आयामों में आगे बढ़ता हूँ ।

मैं इस दुनिया में स्वतंत्र हूँ, हालांकि लोग कह रहे हैं कि धागे अब भी हैं

मैं कहता हूँ कि धागे तो केवल खेलने के लिए होते हैं

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अब मेरा दिल पृथ्वी, आकाश और समुद्र पर घूम रहा

घाटियों में गहरी, जहां कोई भी नहीं देख सकता था

कि मेरी भूमिका में, मैंने आपका पालन करने के लिए

आत्मसमर्पण किया है, मैंने अपने सभी प्रयासों में।

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Written by Avinash

Edited and translated in Hindi by Rini

Photos by Avinash

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